while going these day's complicated life schedule, we want our things group wise collected at one place and nicely organized. Through this blog i am trying to keep some traditional collection of songs, clothes, stories etc, and to provide a simple way for day to day life. I hope that will be helpful for my blog visitors.
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Tuesday, September 9, 2014
Monday, September 8, 2014
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है ( ab kevat ye majdoori le lo, ganga se par utara hai )
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
क्यो शर्मसार करते हो भगवन सब कुछ माल तुम्हारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
१) यह सिताजी की मुदडी है, न लेने में संकोच करो
हमें गंगा से पार उतारा है, बस यही अहसान तुम्हारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
२) यह सिताजी की मुदडी है, इसको कैसे लेलू भगवन
परिवार सहित दर्शन पाए, ये धन्य भाग्य हमारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
३) अब हम समझे यह थोड़ी है, बस इतने में संतोष करो
जो हाजिर है मंजूर करो, बाकी का रहा उधारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
४) देना है तो यही दे दो, तुमरे चरणो का मैं पुजारी बनू
मुझे भव सागर से पार करो, मैने गंगा से पार उतारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
क्यो शर्मसार करते हो भगवन सब कुछ माल तुम्हारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
१) यह सिताजी की मुदडी है, न लेने में संकोच करो
हमें गंगा से पार उतारा है, बस यही अहसान तुम्हारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
२) यह सिताजी की मुदडी है, इसको कैसे लेलू भगवन
परिवार सहित दर्शन पाए, ये धन्य भाग्य हमारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
३) अब हम समझे यह थोड़ी है, बस इतने में संतोष करो
जो हाजिर है मंजूर करो, बाकी का रहा उधारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
४) देना है तो यही दे दो, तुमरे चरणो का मैं पुजारी बनू
मुझे भव सागर से पार करो, मैने गंगा से पार उतारा है
अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं ( suno raghunath tumko par, ab kaise lagau main )
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
चढ़ा कर के तुम्हें ये नाव, क्या अपनी गवाँउँ मैं सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
१) हज़ारों है यहाँ केवट, हज़ारों नाव हैं जल में
बुलालो और केवट को, नहीं अब नाव लगाउँ मैं
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
२) उन्हीं चरनों के रज कण से सिला पाषान थी भारी
अगर जो उड़ गयी नैया, कहो कैसे बताउ मैं
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
३) अगर दो चार होती तो, भले ही एक उड़ जाती
नहीं रहवे एक भी नइया तो कम कर कैसे जाउ मैं
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
४) करूँगा पार मैं इस शर्त पर, मंजूर तुम कर लो
पहले चरण पखारुगा, तुम्हे पीछे चढ़ाउ मैं
सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा ( shri ram apke charno ko, bin dhoye na par lagaunga )
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
१) चरणो में जादू है भारी, तर गयी अहिल्या सी नारी
यह भेद किसे बतलाउँगा, बिन धोए न पार लगाउँगा
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
२) छोटी सी नाव हमारी है, बस यही सहारे ग्रहस्थी है
यह भेद किसे बतलाउँगा, बिन धोए न पार लगाउँगा
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
३) यह लक्ष्मण भी मोपे क्रोध करे, और एक ही बाण में प्राण तजे
मैं प्रेम से प्राण गवाँउँगा, बिन धोए न पार लगाउँगा
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है ( sun mere kevat bhaiya, idhar la naiya )
१) आगे आगे राम चलत है-२
पीछे लक्ष्मण भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
२) बीच बीच में चले जानकी-२
शोभा बरन (वर्णन) न जैइया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
३) राम बिना मेरी सुनी अयोध्या-२
लक्ष्मण बिना ठकूरईया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
४) सीता बिना मेरी सुनी रसोई-२
कौन करे चतुरयिया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
५) सरयू तीर नाव है आवत-२
लाओ केवट नैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
६) वचन पिता के सिर धर लिने-२
वन को चले दौनो भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नइया ( ganga ke khade kinare, bhagwan maang rahe naiya )
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
भगवान माँग रहे नईया, मेरे प्रभुजी माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
१) इतनी सुन केवट आया, वो साथ कठोता (बर्तन) लाया
पहले चरण कमल लू पखार रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
२) इतनी सुन केवट आया, वो साथ में नईया (नाव) लाया
बैठारे हैं लक्ष्मण राम रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
३) उतराई में मुदरी (अंगूठी) दीनी, केवट ने विनती किन्ही
उतराई न लूँगा मेरे राम रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
४) केवट ने वचन उचारे (बोले), तुम आए हो घाट हमारे
मैने सरयू पार उतारे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
५) तुलसी ने आस लगाई, मैने गंगा पार लगाई
मुझे भव से करना पार रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
भगवान माँग रहे नईया, मेरे प्रभुजी माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
१) इतनी सुन केवट आया, वो साथ कठोता (बर्तन) लाया
पहले चरण कमल लू पखार रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
२) इतनी सुन केवट आया, वो साथ में नईया (नाव) लाया
बैठारे हैं लक्ष्मण राम रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
३) उतराई में मुदरी (अंगूठी) दीनी, केवट ने विनती किन्ही
उतराई न लूँगा मेरे राम रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
४) केवट ने वचन उचारे (बोले), तुम आए हो घाट हमारे
मैने सरयू पार उतारे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
५) तुलसी ने आस लगाई, मैने गंगा पार लगाई
मुझे भव से करना पार रे, भगवान माँग रहे नईया
गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
कभी कभी भगवान को भक्तो से काम पड़े ( Kabhi kabhi bhagwan ko bhakto se kaam pade )
कभी कभी भगवान को भक्तो से काम पड़े
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े१) अवध छोड प्रभु वन को धाए, सिया राम लखन गंगा तट आए
केवट मन ही मन हर्षाए, घर बैठे प्रभु दर्शन पाए
हाथ जोड़ कर प्रभु के आगे केवट मगन खड़े
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े
२) प्रभु बोले तुम नाव चलाओ, पार हमें केवट पहुचाओ
केवट बोला सुनो हमारी, चरण धूल की माया भारी
मैं ग़रीब हूँ नैया मेरी, नारी न होये पड़े
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े
३) केवट दौड़ के जल भर लाया, चरण धोय के चरणामृत पाया
वेद ग्रंथ जिनके यश गाय, केवट उनको नाव चढाय
बरसे फूल गगन से एसे, भक्तों के भाग्य बड़े
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े
४) चली नाव गंगा की धारा, सिया राम लखन को आर उतारा
देने लगे प्रभु नाव उतराई, केवट कहे नहीं रघुराई
पार किया मैने प्रभु तुमको, अब तुम मोहे पार करो
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़ेकेवट और राम के भजन (kevat aur ram ke bhajan)
7) मेरी छोटी सी है नाव, तेरे जादू भरे पाव
meri choti si hai naav tere jadu bhare paav click here
(6) कभी कभी भगवान को भक्तो से काम पड़े
Kabhi kabhi bhagwan ko bhakto se kaam pade click here
(5) गंगा के खड़े किनारे, भगवान माँग रहे नईया
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(4) सुन मेरे केवट भैया, इधर ला नैया, हमें वन जाना है
sun mere kevat bhaiya, idhar la naiya click here
(3) श्री राम आपके चरणो को, बिन धोए न पार लगाउँगा
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(2) सुनो रघुनाथ तुमको पार, अब कैसे लगाउ मैं
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(1) अब केवट ये मज़दूरी ले लो गंगा से पार उतारा है
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