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Tuesday, September 9, 2014

घर आवेंगे एक दिन राम, सबरी के हरष भयो (ghar aavenge ek din ram, sabri ke harash bhayo)

घर आवेंगे एक दिन राम, सबरी के हरष भयो
घर आवेंगे एक दिन राम, सबरी के हरष भयो

१) बोले वचन मतंग ऋषि, तू सुन सबरी दे कान
एक समय तेरे घर सबरी
आवेंगे लक्ष्मण राम, सबरी के हरष भयो

२) वचन सुनत निश्चय मन किन्हो, छोड़ो घर को काम
अरे बार बार घर बाहर आवे,
देखन लक्ष्मण राम, सबरी के हरष भयो

३) चख चख नित ही फल लावे, नित ही वन में जाय
खड़ी खड़ी वो वाट निहारे,
कब दर्शन दे आए, सबरी के हरष भयो

४) श्याम गौर सुंदर दो भाई, घर पहुँचे आय
प्रेम मगन मुख वचन न आवे
चरणो में गयी लिपटाय, सबरी के हरष भयो

५) चरण धोय चरणामृत लिन्हो, आसान दियो बिछाय
कंद मूल फल प्रभु को दिन्हे
रूचि रूचि भोग लगाय, सबरी के हरष भयो

६) एसी अधम जात की सबरी , दी निज धाम पठाय
श्याम कहे विश्वास रखे से
दे दर्शन  घर आय, सबरी के हरष भयो 

मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे (me to kar rahi rasta saaf, ram mere kab ghar aaoge)

मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे
राम मेरे कब घर आओगे, नाथ मेरे कब घर आओगे
मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे

१) मैने कब की आसा धारी, मैं बैठी करमा (ध्यान) भारी
मेरे दिल है रे बेहाल , नाथ मेरे कब घर आओगे
मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे

२) कब दीन दुखी मत हीन दुखी
भिलनी को कब अपनाओगे, नाथ मेरे कब घर आओगे
मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे

३) चुन चुन बेर प्रेम से लाई
रघुराई कब पाओगे, नाथ मेरे कब घर आओगे
मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे

४) यहाँ कुटिया में तुम भगवान
कब चरण तुम लाओगे, नाथ मेरे कब घर आओगे
मैं तो कर रही रस्ता साफ़ राम मेरे कब घर आओगे

हे रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे (hey raghuvar meri kuti me padharo re)

हे रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे
 कुटि में पधारो मेरे हृदय में विराजो रे
रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे

१) कब से पुकारू खड़ी कानों न आवाज़ पड़ी
एसी निथुराई प्रभु हमें न दिखाओ जी
रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे

२) चुन चुन के बेर लाउ, भर भर के डलिया लाउ
खट्टे मीठे बेर प्यारे खा के दिखाओ जी
रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे

३) पीलो सो पीताम्बर ओढ़े, वन वन में घूमतो डोले
धनुष बाण लेके प्रभु कुटिया पधारो जी
रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे

४) दशरथ के प्राणं प्यारे, कौशल्या के आँख तारे
अवध रखवारे प्यारे हमें न बिसारो जी
रघुवर प्यारे मेरी कुटि में पधारो रे

बोल बोल काग़ा मेरे, राम कब आएँगे (bol bol kaga mere, ram kab aayenge)

 बोल बोल काग़ा मेरे, राम कब आएँगे-२
दुखिया की झोपड़ी के भाग्य जाग जाएँगे

१) आए नहीं राम जी, लगाई कहाँ देर रे-२
चुन चुन पंछी(बर्तन) में रखे हुए बेर रे
बलि बलि जाउगी , जब राम मेरे आएँगे
दुखिया की झोपड़ी के भाग्य जाग जाएँगे

२) उड़ जा रे काग़ा लादे, राम की खबरिया-२
आएँगे धनुष धारी कौन सी डगरिया
अखियाँ बिछाय दूँगी, वे जहाँ चरण टिकाएँगे
दुखिया की झोपड़ी के भाग्य जाग जाएँगे


३) भोले भाले दौनो भैया बड़े ही रिझावर हैं
टूटी सी मेरी नईया के वो ही पतवार हैं
बूढ़ी ग़रीबनि को पार कब लगाएँगे
दुखिया की झोपड़ी के भाग्य जाग जाएँगे


४) राम की लगान में मगन थी में कागरे
लगी हुई पापों वाली भुझ गयी आग रे
बिगड़ी पुरानी मेरी आके वो बनाएँगे
दुखिया की झोपड़ी के भाग्य जाग जाएँगे