Tuesday, September 8, 2015

जगत मे जिसका जगत पिता रखवाला रे-२
उसे मारने वाला हमने जाग मे नहीं निहारा रे
जगत मे जिसका जगत पिता रखवाला रे

१) एक बहेलिया अपने घर से ले तीर कमान चला भाई
पक्षिन का वध करने के लिए एक जंगल में पहुँचा जाई-२
थे एक पेड़ पर बैठे दो पक्षिन को देखा भाई
थी एक बिचारी कबूतरी और एक कबूतर था भाई-२
आनंद में बैठे थे दौनो थी किसी बात की परवाह ना
फिर एक शिकारी बेदर्दी का अपने मन में हर्षाना-२
झट तीर निकाला तरकश से दे ध्यान ज़रा सुनते जाना
जालिम ने देर करी न ज़रा
तानन लगा निशाना अधर्मी वो नीच हत्यारा रे

२) अब और सुनो सज्जन आगे कैसी विचित्र हरी की माया
नीचे ये ताने तीर खड़ा उपर एक और गजब ढाया-२
उस बाज भयंकर को देखो जो आसमान में मंडराया
चौतरफ़ा नज़र घुमाई ज़रा कुछ खाने को उसका मन चाहा-२
बस उसी पेड़ पर नज़र पड़ी वो बाज प्रसन्न हुआ भाई
अंबर में चक्कर काट रहा वो पक्षी बाज ता बलकारी-२
दौनो पक्षिन को देख लिया हुआ दिल से डोर फिकर भाई
थी घड़ी मे अब तो हे भैया बस झपट्टा मारने की तैयारी-२
उन मासूम लहू का अब तो हो ओ ओ ओ ओ...
उन मासूम लहू का अब तो ईश्वर ही रखवाला रे
जगत मे जिसका जगत पिता रखवाला रे..

३) ये देख कर कबूतर और कबुतरि दौनो का धीरज टूट गया
यू कहने लगी नर से मादा, अब बलम विधाता रूठ गया-२
बस आज हमारे और तुमरे जीवन का डोर टूट गया
बस इसी पेड़ के उपर हम दौनो का भंडा फूट गया-२
ये नीच शिकारी है तैयार धरती पर ताने तीर खड़ा
उपर ये चक्कर काट रहा 


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